बनी रैबिट की बर्थडे पार्टी

बनी रैबिट की अनोखी बर्थडे पार्टी थी। जानना चाहेंगे क्यों? जानने के लिए आपको यह कहानी पढ़नी पड़ेगी।

बनी रैबिट वैसे तो रोज ही खुश रहता है, लेकिन आज तो कारण भी है, बर्थडे है आज।

यह सोचते ही वह बेड से कूदकर उठ गया। आज कितने काम करने हैं, सुबह जल्दी तैयार होना है। मम्मी रैबिट ने कल ही कहा था कि सुबह स्कूल जाने के पहले मंदिर जाना है, भगवान से आशीर्वाद लेने। फिर नाश्ता करके स्कूल जाना और शाम को घर में पार्टी की तैयारी करनी है।

कई फ्रेंड्स आ रहे है पार्टी मे और पापा रैबिट भी तो टूर से शाम को ही आएंगे। कितने दिनो बाद आज लौट रहे है पापा। यह सब सोचकर बनी रैबिट को शाम की पार्टी की उत्सुकता बढ़ गयी। वह तैयार होने जल्दी से बाथरूम की तरफ भागा।

बनी रैबिट को बर्थडे के दिन मंदिर जाना बहुत अच्छा लगता था। वहां पुजारी शंकर हाथी मंदिर से अपनी सूंढ में एक माला उठाकर बनी को पहना देते हैं। एक बड़ा सा लाल टीका बनी के माथे पर लगाते हैं, ढेर सारी मिठाई और एक सुंदर सी शर्ट गिफ्ट करते हैं। पुजारी जी की पत्नी पार्वती हथनी शर्ट खुद ही मशीन से सील कर बनाती है। बनी रैबिट की मम्मी भी हर साल पुजारी के लिए कोट ले कर जाती हैं।

बनी नहा कर बाहर निकला तो उसने बेड पर नजर डाली। उसकी मम्मी एक स्मार्ट सा सूट रख गयी थी। वह उसका बर्थडे गिफ्ट होगा।

‘वाउव! कितना स्मार्ट सूट है।‘ तैयार होने के बाद उसने अपने ऊपर एक नजर डाली।

मै किसी हीरो से कम नहीं लग रहा हूँ, मेरे फ्रेंड्स को भी कितना अच्छा लगेगा। आज तो स्कूल में मजा ही आ जाएगा। पूरे स्कूल के बच्चों को पता चल जाएगा कि आज मेरा हैप्पी बर्थडे है।

‘हैप्पी बर्थडे बेटा,’ यह कहकर मम्मी ने उसे गले लगा लिया।

‘वाह, तुम तो बहुत स्मार्ट लग रहे हो। तुम्हें यह सूट कैसा लगा?’

‘बहुत अच्छा है मम्मी, थैंक यू वेरी मच।‘

‘चलो अब जल्दी से हम लोग मंदिर चलते हैं, फिर लौट कर नाश्ता करना’।

बनी रैबिट और मम्मी दोनों पुजारी के लिए कोट ले कर मंदिर की तरफ बढ़ गए।

मंदिर पहुंचे तो पुजारी शंकर हाथी तैयार बैठे हुए थे। उन्हें मालूम था कि आज बनी का बर्थडे है। हर बार की तरह उन्होंने माथे पर लाल टीका लगाया, एक सुंदर सी माला बनी के गले में डाली और उसे गिफ्ट दिया।

‘इतने बड़े गिफ्ट में क्या है?’ उसे जल्दी थी कि खोल कर देखें कि उसके अंदर क्या है, लेकिन मम्मी ने मना कर दिया,

‘अभी नहीं, घर जाकर शाम को देखना नहीं तो तुम्हें स्कूल जाने में देर हो जाएगी।‘

शंकर हाथी पुजारी अंकल ने भी मना किया था कि यह अभी मत खोलना। इसको शाम को पार्टी में ही खोलना। वह उस गिफ्ट के बारे में कुछ खास बात वह बताएंगे।

घर पहुंचकर वह उस गिफ्ट के बारे में भूल गया क्योंकि आज मम्मी ने उसका मनपसंद नाश्ता बनाया था, कैरेट सेंडविचेस और कैरेट हलवा। बनी ने जल्दी से नाश्ता खत्म किया क्योंकि उसकी बस आ गई थी और वह अपना टिफिन और स्कूल के बच्चों के लिए जो स्वीट्स डिसटीब्यूट करनी थी उसका पैकेट और स्कूल बैग लेकर उसकी तरफ भागा।

उस दिन दोपहर में स्कूल से लौटने के बाद बनी बहुत थक गया था, इसलिए वह घर आकर खाना खा कर आराम करने के लिए लेट गया। मम्मी ने उससे कहा था कि तुम आराम कर लो उसके बाद जंगल से जाकर पीली पत्तियां ले आना डेकोरेशन के लिए। मम्मी को बनी से हेल्प चाहिए थी, क्योंकि घर में पापा भी नहीं थे इसलिए सारा डेकोरेशन का काम खुद बनी और मम्मी को मिलकर ही करना था।

बनी के फ्रेंड्स को शाम को 5:00 बजे पार्टी मे आना था।

बनी जब सोकर उठा तो घर में बहुत अच्छी सी खुशबू आ रही थी। बनी रैबिट की मम्मी ने बहुत सारी चीजें बनाई थी, जैसे चॉकलेट केक, बर्गर, और छोले भटूरे।

बनी ने घड़ी देखी तो शाम के 4 बज चुके थे। मम्मी अकेले ही डेकोरेशन में बिजी थी। घर को उन्होंने रंग बिरंगी बलून और फूलों से सजा दिया था। कुछ पत्तियां रह गई थी जो जंगल में ही मिल पाती है।

बनी एकदम से उठा और बोला,

‘मम्मी मैं जंगल जा रहा हूं पत्तिया लेने,’ यह कहकर वो तेजी से भाग गया।

मम्मी ने पीछे से बुलाया, ‘ बनी रुको, बनी रुको मैं बता दूं तुम्हें कौन सी पत्ती लानी है।’

लेकिन हर बार की तरह बनी बिना सुने ही भाग गया और दूर से बोला,

‘मम्मी मुझे मालूम है कौन सी पत्ती लानी है, मैं जा रहा हूं वरना देर हो जाएगी और वह बिना कुछ सुने जंगल की तरफ भाग गया।

जंगल पहुंचने के बाद उसे याद आया कि उसने मम्मी से यह तो पूछा ही नहीं कि किस कलर की पत्तियां कही थी। यह तो वह भूल ही गया था, अब वापस घर जा कर पूछ कर आने में तो और देर हो जाएगी।

जंगल में उसे रंग बिरंगी पत्तियाँ दिख रही थी। कोई हरी, पीली और लाल। उसे लाल पत्तियाँ अच्छी लगी तो उसने लाल पत्तियां खूब सारी तोड़ ली। जल्दी में वह बैग लेकर नहीं आया था इसलिए सारी पत्तियां उसने अपने हाथ में ही दबा ली थी। अब वह जल्दी घर पहुंच जाना चाहता था।

तभी उसे पीछे से मिली स्क्विरल की आवाज आई,

बनी रुको, बनी रुको

बनी ने पीछे देखा और हाथ हिलाकर स्क्विरल को मना कर दिया। वह जल्दी में था इसलिए बिना रुके आगे बढ़ गया।

उसके बाद उसे एक और आवाज सुनाई पड़ी जो मिट्ठू तोते की थी। वह ऊपर से उड़ता हुआ जा रहा था वह भी यही बोला,

बनी रुको, बनी रुको

लेकिन बनी और तेजी से भागा। उसे समझ नहीं आ रहा था कि लोग उसको आज क्यों रोक रहे हैं। वह जल्दी से जल्दी घर पहुंच जाना चाहता था। शाम के 5:00 बजे से उसके फ्रेंड आने वाले थे।

कुछ देर में वह घर पहुंचने ही वाला था कि उसे एक अजीब सी बेचैनी शुरू हो गई। उसने देखा कि उसके हाथ में लाल-लाल से दाने हो गए हैं। जैसे ही वह घर के पास पहुंचा तो देखा कि उसकी मम्मी गेट पर ही खड़ी थी। वह परेशान दिख रही थी, उन्होंने दूर से ही बनी को इशारा किया कि पत्तियों को फेंक दो। बनी इस बात को समझ नहीं पा रहा था कि मम्मी क्या कह रही है वह पत्तियां फेंकने को क्यों बोल रही है। जैसे ही वह मम्मी के पास पहुंचा, मम्मी दूर से ही चिल्लाई,

‘बनी यह पत्तियां फेंक दो, तुम्हें बात समझ नहीं आ रही है, यह जहरीली पत्तियां है इनसे तुम्हें खुजली हो जाएगी।’

यह सुनते ही बनी का सर चकराया खुजली शुरू नहीं हो जाएगी खुजली तो शुरू हो ही गई है। बनी ने तुरंत पत्तियों को बाहर फेंक दिया और जोर से चिल्लाया,

‘मम्मी मेरे हाथों में बहुत खुजली हो रही है।‘

मम्मी ने बनी के हाथ देखें तो उन्होंने  बनी को तुरंत नहाने के लिए बोला और साथ में डिटॉल का पानी भी दे दिया। उसके बाद उन्होंने डॉक्टर से फोन करके दवा पूछी और वह दवा नहाने के बाद बनी के हाथों में अच्छी तरह से लगा दी और बनी को प्यार से समझाया,

‘अभी थोड़ी देर में खुजली ठीक हो जाएगी। तुम परेशान मत हो,’ उन्होंने देखा कि बनी के आंखों में आंसू था। मम्मी भी बहुत दुखी हुई, कि आज बर्थडे वाले दिन बनी को खुजली हो गई लेकिन डॉक्टर ने जैसा कहा था बनी को थोड़ी देर में ही आराम आने लगा और वह किसी तरह से उठा और अपने नए कपड़े पहन लिए क्योंकि उसके फ्रेंड्स के आने का टाइम हो गया था।

कुछ ही देर में उसके सारे फ्रेंड आ गए थे। जिसमें मिंटू बंदर, मिनी बकरी, सोनू गिलहरी, चिंकी रैबिट और भी बहुत सारे फ्रेंड्स थे। सभी के हाथों में लाल पीले नीले गिफ्ट पैकेट्स थे। थोड़ी देर में उसने देखा मिली स्क्विरल और मिट्ठू तोता दोनों हाथ में बहुत सारी पीली पत्तियां लेकर आ गए हैं और उन्होंने आकर वह पत्तियां बनी रैबिट की मम्मी को दे दिए। मम्मी मुस्कुराने लगी और बनी से बोली,

‘बनी मैंने तुमको पीली पत्ती लाने को बोला था। लाल पति जहरीली होती है और पीली पत्ती नरम मुलायम और खुशबूदार होती है, इसीलिए तुमको मै बुला रही थी, लेकिन तुमने मेरी बात सुनी नहीं और देखो यह दोनों इस बात को समझ गए थे कि मैंने पीली पत्तियां मंगाई होगी इसलिए यह अपने आप लेकर आए हैं।‘

बनी ने जाकर मिठू तोता और मिली स्क्विरल को गले लगा लिया।

उसी समय पापा रैबिट की कार भी आकर गेट पर रुकी। बनी उनको देखकर भागा और उनकी गोद पर चढ़ गया,

‘कितने दिनों बाद आए हैं पापा।’

उसके बाद तो फिर पार्टी जोर-शोर से शुरू हो गई म्यूजिक बजने लगा, जिसमें बच्चे डांस कर रहे थे। खाने की बहुत बढ़िया-बढ़िया चीजे पापा रैबिट शहर से लाए थे।

सभी ने मिलकर छोले भटूरे का खूब मजा लिया। उसके बाद जब केक काटने की बारी आई तो सभी के गिफ्ट मम्मी ने टेबल पर ही सजा दिए थे। बच्चों ने मिलकर केक काटा। गिफ्ट की टेबल को देख कर बनी को याद आया हाथी अंकल का गिफ्ट भी तो रखा होगा। वह अपने कमरे में गया और उसके गिफ्ट को उठा लाया और वही टेबल पर रख दिया। फिर मम्मी से पूछा,

‘वह पुजारी हाथी अंकल क्यों नहीं आए?’

उसी समय बाहर से हाथी अंकल की आवाज सुनाई पड़ी, पापा रैबिट बाहर जाकर हाथी अंकल को अंदर ले आए।

बनी को गिफ्ट खोल कर देखने की जल्दी थी तो उसने केक खाने के बाद गिफ्ट खोलने लगा।  वह जानना चाहता था कि हाथी अंकल ने उसे क्या दिया है। धीरे-धीरे सभी के गिफ्ट खुल गए। किसी ने पेंसिल बॉक्स दिया था किसी ने नोटबुक, किसी ने पेन किसी ने बॉल और किसी ने बोर्ड गेम दिया था। पर जिस गिफ्ट को खोलने की जल्दी बनी को थी वह अब खुलने वाला था।

रैपर खोलने के बाद बनी ने उसमें से एक बहुत सुंदर टेलीफोन बूथ की डिजाइन का बड़ा सा बॉक्स था। जिसमें एक ताला और चाबी लगी थी। वह रेड कलर का टेलीफोन बूथ था। इतना अनोखा और सुंदर गिफ्ट बनी ने कभी नहीं देखा था। उसकी आंखें चमक गई उसने हाथी अंकल को देखकर पूछा,

‘यह क्या है अंकल?’

हाथी अंकल मुस्कुराए और बोले,

‘बनी यह तुम्हारा पर्सनल बैंक है तुम इसमें पैसे जमा करोगे और वह धीरे-धीरे बढ़ जाएंगे।  इसका ताला अगली बर्थडे में खोलना और जो पैसे तुम्हारे जमा हो जाएंगे उससे तुम अपना सही वाला बैंक अकाउंट खोल देना और इसी तरह से पैसे जमा करते रहना, तो तुम्हारे पास एक दिन अपने बहुत सारे पैसे जाएंगे फिर तुम अपने मनपसंद की चीजें खुद भी खरीद पाओगे।

‘वॉउव!’ बनी की आँखों मे चमक गयी।

उसको अपना यह गिफ्ट बहुत ही अनोखा लगा। ऐसा उसने कभी नहीं सोचा था कि उसके पास उसका पर्सनल बैंक होगा और वह अपने बैंक का मालिक होगा।

‘सच में आपका गिफ्ट बहुत अच्छा है। बच्चों में अच्छी आदत डालने के लिए यह एक बहुत सही तरीका है।‘

बनी के पापा मम्मी ने शंकर हाथी को बोला।

पार्टी खत्म हो जाने के बाद रात में जब बनी और उसके पापा मम्मी घर पर रह गए तो मम्मी ने बनी से पूछा,

‘बोलो बेटा, आज का दिन तुम्हें कैसा लगा?’

बनी ने जवाब दिया, ‘मम्मी आज का दिन मैं कभी नहीं भूल पाऊंगा। मैंने आज दो बातें सीखी कि बिना पूछे, समझे और जाने बगैर कोई काम मत करो, पहले ठीक से समझो, फिर काम करो नहीं तो बाद में परेशानी हो सकती है।

‘और दूसरी?’

‘दूसरी यह कि मैं इतना छोटा होकर भी मैं बैंक का मालिक हो सकता हूं।‘

पापा और मम्मी ने एक दूसरे को देखा मुस्कुराए और फिर जोर से खिल खिलाकर हंस दिए, बनी भी उनका साथ दे रहा था।

यह सच में उसका बेस्ट बर्थडे था।

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